पिता का साया बचपन में उठा, मां के संघर्ष और बेटी की मेहनत ने लिखी सफलता की नई इबारत
पिता का साया बचपन में उठा, मां के संघर्ष और बेटी की मेहनत ने लिखी सफलता की नई इबारत
हमीरपुर की वैष्वी शर्मा ने NEET-UG 2026 में 653 अंक और AIR 1239 हासिल कर प्रदेश का बढ़ाया मान
हमीरपुर, 6 अगस्त। दृढ़ संकल्प, कठिन परिश्रम और मां के अथक संघर्ष ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो तो सफलता निश्चित मिलती है। इसका प्रेरणादायक उदाहरण हमीरपुर की वैष्वी शर्मा, पुत्री स्वर्गीय सज्जन कुमार, ने प्रस्तुत किया है। वैष्वी ने NEET-UG 2026 की परीक्षा में 653 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1239 हासिल की है। इस शानदार उपलब्धि से उन्होंने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे हमीरपुर और हिमाचल प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया है।
वैष्वी के पिता स्वर्गीय सज्जन कुमार का लगभग 15 वर्ष पूर्व निधन हो गया था। पिता के निधन के बाद परिवार की समस्त जिम्मेदारी उनकी माता मोनिका गौतम के कंधों पर आ गई। मोनिका गौतम एक निजी कॉलेज में कार्यरत हैं। सीमित आय और अनेक कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा में कभी कोई कमी नहीं आने दी। उन्होंने हर चुनौती का डटकर सामना किया और अपनी मेहनत, त्याग तथा समर्पण से बेटी के सपनों को साकार करने का मार्ग प्रशस्त किया।
वैष्वी ने अपनी प्रारंभिक एवं स्कूली शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV), हमीरपुर से प्राप्त की। वह शुरू से ही एक मेधावी एवं अनुशासित छात्रा रही हैं। उन्होंने सीबीएसई कक्षा 12 की परीक्षा में नवोदय विद्यालय समिति (NVS) की क्षेत्रीय टॉपर बनकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था।
अपनी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर वैष्वी का चयन दक्षणा फाउंडेशन, पुणे की प्रतिष्ठित एक वर्षीय आवासीय छात्रवृत्ति के लिए हुआ। यहां उन्हें NEET की निःशुल्क कोचिंग के साथ-साथ आवास एवं भोजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। पूरे एक वर्ष तक परिवार से दूर रहकर उन्होंने कठिन अनुशासन के साथ अपनी तैयारी जारी रखी। संस्थान के नियमों के अनुसार विद्यार्थियों के पास मोबाइल फोन नहीं होता था तथा परिवार से केवल सीमित समय के लिए ही बातचीत की अनुमति थी। इन परिस्थितियों के बावजूद वैष्वी ने पूरे आत्मविश्वास, धैर्य और समर्पण के साथ अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा और अंततः उल्लेखनीय सफलता हासिल की।
वैष्वी ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता, शिक्षकों, जवाहर नवोदय विद्यालय, दक्षणा फाउंडेशन तथा उन सभी लोगों को दिया जिन्होंने समय-समय पर उनका मार्गदर्शन और उत्साहवर्धन किया।
वैष्वी शर्मा की यह सफलता उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि संघर्ष कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनता, बल्कि वही संघर्ष आगे चलकर सबसे बड़ी ताकत साबित होता है।
Comments
Post a Comment