आर्थिक बदहाली की कगार पर हिमाचल सुक्खू सरकार : कमलेश कुमारी

 आर्थिक बदहाली की कगार पर हिमाचल सुक्खू सरकार : कमलेश कुमारी 

Him View - Hamirpur Himachal Pradesh 


भोरंज विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक एवं भाजपा प्रदेश महामंत्री महिला मोर्चा कमलेश कुमारी ने कहा कि देवभूमि हिमाचल प्रदेश इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन आर्थिक दौर से गुजर रहा है। प्रदेश की वित्तीय स्थिति इतनी नाजुक हो चुकी है कि इसे 'आर्थिक कंगाली' का नाम दिया जा रहा है। आम जनता का आरोप है कि कांग्रेस नेतृत्व की नाकामियों और कुप्रबंधन ने राज्य को कर्ज के ऐसे जाल में फंसा दिया है, जिससे निकलना नामुमकिन लग रहा है।

प्रदेश का 'रीढ़ की हड्डी' कहे जाने वाले कर्मचारी और पेंशनभोगी आज अपने हक के लिए तरस रहे हैं। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब हजारों कर्मचारियों और करीब 1.5 लाख पेंशनभोगियों को समय पर भुगतान नहीं मिला।2016 से लंबित वेतन आयोग के एरियर और महंगाई भत्ते (DA) की किस्तों को लेकर पेंशनर संगठनों ने शिमला में जोरदार प्रदर्शन किया है। उनका आरोप है कि सरकार एक तरफ खजाना खाली होने का रोना रोती है, वहीं दूसरी तरफ फिजूलखर्ची जारी है।

 उन्होंने कहा कि हालिया आंकड़ों (PLFS 2025) के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में युवा बेरोजगारी दर देश में सबसे अधिक (33.9%) दर्ज की गई है। शिक्षित युवा नौकरियों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, जबकि सरकारी भर्ती प्रक्रियाएं ठप पड़ी हैं या विवादों में घिरी हैं। 'बेरोजगार' आज प्रदेश की इस बदहाली का सबसे बड़ा शिकार बना है।

सरकार पर आरोप लगाते हुए कमलेश कुमारी ने कहा कि प्रदेश सरकार, सरकार का खजाना भरने के लिए सीधे तौर पर आम आदमी की जेब काट रही है।

बिजली पर सेस, पानी के बिलों में बढ़ोतरी और अन्य अप्रत्यक्ष करों ने मध्यम और निर्धन वर्ग की कमर तोड़ दी है।

  टैक्स के इस बोझ ने रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं को महंगा कर दिया है, जिससे दिहाड़ीदार मजदूर और निर्धन वर्ग का शोषण बढ़ रहा है।

प्रदेश में विकास कार्य पूरी तरह ठप नजर आ रहे हैं। सरकारी ठेकेदारों का करोड़ों रुपया बकाया है, जिसके कारण निर्माण कार्य रुक गए हैं। बजट का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 80%) केवल वेतन, पेंशन और कर्ज के ब्याज को चुकाने में जा रहा है, जिससे नए बुनियादी ढांचे के लिए पैसा ही नहीं बचा है।


कमलेश कुमारी ने सरकार को घेरते हुए कहा है कि सुक्खू सरकार अपनी नाकामियों का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने "मित्रों" को रेवड़ियां बांटने और अनावश्यक नियुक्तियों में पैसा बर्बाद किया, जबकि प्रदेश का आम नागरिक बदहाली के आंसू रो रहा है।

हिमाचल प्रदेश का कर्ज का ग्राफ 1 लाख करोड़ रुपये की ओर बढ़ रहा है। अगर समय रहते कड़े और ईमानदार आर्थिक फैसले नहीं लिए गए, तो प्रदेश का आर्थिक ढांचा पूरी तरह चरमरा सकता है।

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