प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता मानव जीवन के लिए जरूरी : डॉ रमेश रत्तन प्रेमी
प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता मानव जीवन के लिए जरूरी : डॉ रमेश रत्तन प्रेमी
Him View - Hamirpur Himachal Pradesh
सेवानिवृत्त वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश रतन प्रेमी मौसमी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे लोगों को प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के आयुर्वेदिक उपायों के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
हर मौसम के बदलने के साथ इस क्षेत्र में सर्दी, खांसी, वायरल संक्रमण, साइनस जाम, गले में खराश, श्वसन समस्याएँ, जोड़ों में दर्द, पाचन असंतुलन और तनाव के कारण प्रतिरक्षा क्षमता में कमी जैसी समस्याएँ देखने को मिलती हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए डॉ. प्रेमी लोगों को यह समझा रहे हैं कि बीमारी से पहले जागरूक रहना और नियमित निवारक उपाय अपनाना सबसे प्रभावी सुरक्षा है।
वे बताते हैं कि मौसमी बदलाव के दौरान शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, जिससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है। उनके अनुसार मजबूत प्रतिरक्षा का सीधा संबंध पाचन, मानसिक स्थिरता, नींद की नियमितता और संतुलित, पौष्टिक भोजन से है।
डॉ. प्रेमी नागरिकों, परिवारों और युवा आयुर्वेद अभ्यासकर्ताओं को सरल, सुरक्षित और बिना दुष्प्रभाव वाले घरेलू आयुर्वेदिक उपायों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
उनकी मुख्य सिफारिशों में शामिल हैं — गिलोय, तुलसी, दालचीनी, लौंग, काली मिर्च, हल्दी वाला दूध और ताजा हर्बल काढ़ा, जो शरीर की प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं। वे यह भी सुझाव देते हैं कि गर्म पानी का नियमित सेवन, नाक और छाती जाम होने पर भाप लेना, तथा हर्बल चाय का सेवन लाभकारी है।
इसके अलावा वे जीवन में अनुशासन और नियमित दिनचर्या अपनाने की सलाह देते हैं। जैसे — खाने के तुरंत बाद ठंडे वातावरण से बचना, तला-भुना और तैयार भोजन कम करना, पर्याप्त पानी पीना, योग या हल्का व्यायाम करना, सात से आठ घंटे की नींद लेना और मौसमानुसार ताजा एवं स्वच्छ भोजन लेना। वे इसे “रोजमर्रा का आयुर्वेद” मानते हैं, न कि केवल बीमारी के समय अपनाया जाने वाला उपाय।
डॉ. प्रेमी के मार्गदर्शन से प्रभावित होकर कई स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इन आयुर्वेदिक सुझावों को अपनाने से उन्हें सांस लेने में आसानी, साइनस में राहत, मजबूत पाचन, बेहतर नींद और मौसमी संक्रमण से बचाव में मदद मिली है।
स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी और युवा आयुर्वेद अभ्यासकर्ता उनकी सराहना करते हैं कि डॉ. प्रेमी पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को संरक्षित रखते हुए इसे आधुनिक जीवन में व्यावहारिक रूप से लागू कर रहे हैं।
डॉ. प्रेमी बार-बार यह संदेश देते हैं कि “आयुर्वेद बीमारी से पहले अपनाने पर सबसे अधिक सुरक्षा देता है, न कि केवल बीमारी के बाद।”
उनके प्रयास समाज में प्राकृतिक स्वास्थ्य-जागरूकता, आत्म-देखभाल और दवा-निर्भरता से हटकर प्राकृतिक उपचार और स्वास्थ्य जिम्मेदारी को बढ़ावा दे रहे हैं। इस प्रयास से क्षेत्र धीरे-धीरे एक स्वास्थ्य-सजग और प्राकृतिक रूप से सशक्त समाज की ओर अग्रसर हो रहा है।

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