कांग्रेस की सुक्खू सरकार में प्रदेश का हर वर्ग दुखी: राजेंद्र गर्ग

 कांग्रेस की सुक्खू सरकार में प्रदेश का हर वर्ग दुखी: राजेंद्र गर्ग 




Him View - Hamirpur Himachal Pradesh 

पूर्व खाद्य आपूर्ति मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र गर्ग ने कांग्रेस सरकार पर प्रदेश की जनता को गुमराह करने का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि सुक्खू सरकार में प्रदेश का हर वर्ग दुखी है और भाई भतीजावाद भी चरम सीमा पर है यह शब्द पूर्व मंत्री राजेंद्र गर्ग ने घुमारवीं में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहे

कांग्रेस सरकार पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हुए राजेंद्र गर्ग ने कहा कि चुनावों के समय सुक्खू सरकार ने हिमाचल की महिलाओं से वायदा किया था कि उन्हें 1500 रुपए भत्ता प्रतिमाह दिया जाएगा लेकिन आज तक प्रदेश की भोली भाली महिलाओं को ना 1500 रुपए उनके खाते में आए ना ही वायदा पूरा हुआ इतना ही नहीं 

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने चुन-चुन कर महिला कर्मचारियों के दूर दराज के क्षेत्रों में स्थानांतरण किए और उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

बीपीएल में चयनित महिलाओं क़ो केंद्र और प्रदेश सरकारें असंख्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान कर निर्धन परिबारों क़ो आत्मनिर्भर बनने में सहयोग करती हैं। बीपीएल सर्वे की नियमावली के अनुसार लगभग 90% निर्धन परिवार बीपीएल सूची से बाहर हो गए। इस छंटनी से सबसे अधिक नुकसान महिला वर्ग क़ो हुआ । राजेंद्र गर्ग ने कहा कि 

18 से 60 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं से कांग्रेस के नेताओं ने झूठ बोल कर वोट तो ले लिए लेकिन अब अपना वायदा नहीं निभा रहे हैं। पशु पालन और खेती वाड़ी करने वाली काम काजी महिलाएं दूध और गोवर सरकार क़ो बेच कर स्वावलम्बी बनने की राह देख रही हैं। 

मनरेगा में काम करने बाली और अन्य असंगठित क्षेत्र में काम करने बाली कामगार महिलाओं क़ो गत 30 महीनों से किसी भी प्रकार का लाभ नहीं मिल रहा है। कामगार कल्याण बोर्ड की कार्य प्रणाली से कामगार महिलाएं बुरी तरह प्रभाबित हुई हैं। उनके अध्ययनरत बच्चों की छात्रवृति बंद हो गई है।


 महिलाओं क़ो प्रशव के समय मिलने बाली सहायता राशि भी नहीं मिल रही है। न बेटी की शादी पर 51000 रूपये मिल रहे हैं और न ही गंभीर बीमारी के मौक़े पर एक लाख से चार लाख तक की चिकित्सा सहायता उपलवद्ध हो रही है। 

कामगार महिलाएं बड़े निर्धन परिवारों से सम्बन्ध रखती हैं और मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। कामगार कल्याण बोर्ड मजदूरों के परिवारों क़ो शिक्षा, चिकित्सा और अनेक अन्य क्षेत्रों में सहायता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा था लेकिन कांग्रेस पार्टी की सम्बेदनहीन सरकार ने हिमाचल प्रदेश की कामगार महिलाओं का यह सहारा भी छीन लिया है पूर्व मंत्री राजेंद्र गर्ग ने कहा कि 

हिमाचल प्रदेश सरकार ने गहरी आर्थिक तंगी और बढ़ते कर्ज़ के बीच मंत्रियों के यात्रा भत्तों में बढ़ोतरी कर दी है। सरकार का यह फैसला न केवल जनता के बीच गुस्सा पैदा कर रहा है, बल्कि उसकी वित्तीय नीतियों और प्राथमिकताओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

राज्य सरकार पिछले कई महीनों से वित्तीय स्थिति को लेकर लगातार “मुश्किल दौर” की बात कर रही है, विभागों को खर्च घटाने के निर्देश दे रही है और कर्मचारियों को बकाया भुगतान में देरी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में मंत्रियों के भत्तों में बढ़ोतरी को लेकर आलोचना होना स्वाभाविक है।

गर्ग ने कहा कि 

नई अधिसूचना के अनुसार, मंत्रियों के लिए यात्रा भत्ते को ₹18 प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर ₹25 प्रति किलोमीटर कर दिया गया है, जबकि दैनिक भत्ते को ₹1,800 से बढ़ाकर ₹2,500 किया गया है। यह संशोधन मंत्रियों के वेतन और भत्ते अधिनियम, 2000 के तहत लागू किया गया है और अब इसे हिमाचल प्रदेश मंत्रियों के यात्रा भत्ता (संशोधन) नियम, 2025 कहा जाएगा। राजेंद्र गर्ग ने कहा कि 

दिलचस्प बात यह है कि यह प्रस्ताव 2024 में ही पास हो चुका था, लेकिन वित्तीय संकट के चलते इसे लागू नहीं किया गया था। अब जब राज्य की आर्थिक स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, तब इस फैसला लागू करने को लेकर और भी ज्यादा आलोचना हो रही है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि पिछले कुछ महीनों में ही विधायकों, मंत्रियों और सदन के पीठासीन अधिकारियों के वेतन और भत्ते में लगभग 24% की बढ़ोतरी की गई थी। यात्रा भत्ते में इस नई वृद्धि के साथ, राज्य सरकार पर सालाना ₹25 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है।

सरकार का दावा है कि भत्तों में यह संशोधन लंबे समय से लंबित था और बढ़ती कीमतों के अनुरूप इसे अद्यतन करना आवश्यक था। लेकिन आलोचकों का कहना है कि वित्तीय संकट के दौर में यह ‘समय’ बेहद अनुचित और “जनभावनाओं के खिलाफ” है। गर्ग ने कहा कि 

राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति किसी से छिपी नहीं है। हिमाचल प्रदेश बढ़ते कर्ज़ के बोझ से दबा हुआ है और उधारी की सीमाएं तंग होती जा रही हैं। केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय अनुशासन को लेकर कड़े निर्देश दिए जाने के बाद राज्य के पास खर्च करने की क्षमता और सीमित हो गई है।


कई विभागों को गैर-जरूरी खर्च रोकने के आदेश हैं, जबकि पे-एंड-अकाउंट ऑफिसेज़ में बिलों के भुगतान में लगातार देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं। कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और जीपीएफ निकासी में भी समय-समय पर रुकावटें देखी जा रही हैं। ऐसे वातावरण में मंत्रियों के भत्ते बढ़ाना कहीं न कहीं आम जनता के लिए यह संदेश देता है कि सरकार ‘ऊपर’ के खर्चों को प्राथमिकता दे रही है।


राजनीतिक विश्लेषकों की राय में विधायकों और मंत्रियों के भत्ते बढ़ाने का मुद्दा भारतीय राजनीति में अक्सर सर्वदलीय सहमति के साथ पारित होता है, चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष। विधानसभा के भीतर इस पर गंभीर विरोध की उम्मीद कम ही की जाती है 

गर्ग ने कहा कि सरकार तर्क दे रही है कि यात्रा भत्ता वर्षों से नहीं बढ़ाया गया था और मंत्रियों को उनके आधिकारिक दौरे के दौरान वास्तविक खर्चों की तुलना में कम भुगतान मिल रहा था

राजेंद्र गर्ग ने कहा कि पता नहीं कामगार कल्याण बोर्ड में लेबर सेस के रूप में जमा करोड़ों रूपये सरकार ने कहाँ रख दिए हैं। उन्होंने प्रदेश के मुख्य मंत्री सुखविंद्र सिंह सुखू क़ो चेताबनी देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के निर्धन परिवारों की कामगार महिलाएं कांग्रेस क़ो कभी भी माफ नहीं करेंगी। कांग्रेस ने गरीव मजदूरों क़ो कुछ लाभ देना तो दूर जो सुबिधा कामगार कल्याण बोर्ड दे रहा था उसे भी बंद कर दिया। जिसका खामियाजा भुगतने के लिए कांग्रेस सरकार तैयार रहे

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