नेक्स्ट जेन जीएसटी "आर्थिक सुधार एवं सहयोगी संघवाद की एक मॉडल तकनीक" : सुमीत
नेक्स्ट जेन जीएसटी "आर्थिक सुधार एवं सहयोगी संघवाद की एक मॉडल तकनीक" : सुमीत
Him View - Hamirpur Himachal Pradesh
सकल जीएसटी की प्राप्तियाँ वित्त वर्ष 2018 मे 7.19 लाख करोड़ से बढ़कर वर्ष 2025 मे 22.08 लाख करोड़ हुई
*हमीरपुर, 22 सितम्बर:* भारतीय जनता पार्टी जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर की अध्यक्षता में आज भोरंज विधानसभा क्षेत्र के व्यापरियों के साथ नेक्स्ट जेन जीएसटी के अर्थिक सुधारों पर संवाद बैठक आयोजित की गई। बैठक में पूर्व विधायक कमलेश कुमारी व अनिल धीमान, मंडल अध्यक्ष अशोक ठाकुर व अभयवीर लवली, मंडल महामंत्री अजय शर्मा, परवीन चंदेल, संजीव रिंटू, हिटलर ठाकुर, तथा मीडिया प्रभारी संजय ठाकुर भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर प्रदेश सचिव सुमीत शर्मा ने आज यहाँ भोरंज में उपस्थित व्यापारियों और कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि नेक्स्ट जेन जीएसटी देश के लिए "आर्थिक सुधार एवं सहयोगी संघवाद की एक मॉडल तकनीक" है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का यह निर्णय ऐतिहासिक, गरीब, मध्यम वर्ग किसान-बागबान की रक्षा करने के साथ साथ राष्ट्रीय राजकोष को भी मजबूती देने वाला सिद्ध होगा। इस संशोधन से पुरानी चार-स्तरीय दर व्यवस्था को हटाकर अब सिर्फ दो स्तरीय दर 5 फीसदी और 18 फीसदी को सरल एकीकृत करनीति के तहत लागू किया जा रहा है।
सुमीत शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार, वर्ष 2014 से ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, देश के कर ढाँचे को सरल, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि अटल सरकार के समय से वर्ष 2000 से ही केलकर टास्क फ़ोर्स की सिफारिशों से कर सुधार की पहल की गयी। जहाँ व्यापक राजनैतिक चर्चा, तकनीकी तैयारियां और केंद्र व राज्यों के बीच राजस्व प्राप्त और वितरण संबन्धित ज़रूरी समझौते की तैयारी कर " एक देश, एक कर और एक बाजार" के सिद्धांत पर आधारित जुलाई -2017 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) को मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार ने लागू किया गया। उन्होंने बताया कि 3 सितम्बर 2025 को पारित नेक्स्ट जेन जीएसटी के लागू होने से देश के 140 करोड़ वासियों के उपभोक्ता, व्यापारी वर्ग, उद्योग और विनिर्माण जगत के लिए वरदान साबित होगा। आम जनमानस, किसान, छोटे और मझोले व्यापारियों के लिए नेक्स्ट जेन जीएसटी रिटर्न की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इस नेक्स्ट जेन जीएसटी के 22 सितम्बर 2025 को लागू होने से जनता को सीधी राहत मिलेगी जिसमे ज़रूरी उपयोग की वस्तुओं जैसे – दवाइयाँ, खाद्य पदार्थ, स्वास्थ्य सेवाओं, मोबाइल पार्ट्स, कृषि उपकरण और घर बनाने की सामग्री पर टैक्स दरें कम की गई हैं। सामान्य परिवारों को सीधा लाभ होगा और माताओं ओर बहनों के घरेलू बजट का बोझ भी कम होगा।
जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर ने इस अवसर पर कहा कि डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने से देश को अन्य क्षेत्रों के साथ आर्थिक और राजस्व प्राप्तियाँ को मजबूती मिली है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 मे अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या 65 लाख से बढ़कर वर्ष 2025 तक 1.51 करोड़ हो गई है जोकि 132 फीसदी की वृद्धि को दर्शाता है। वहीं पर सकल जीएसटी की प्राप्तियाँ वित्त वर्ष 2018 मे 7.19 लाख करोड़ से बढ़कर वर्ष 2025 मे 22.08 लाख करोड़ हो गई है जो कि 207 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।उन्होंने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी रिपोर्ट मे कहा कि नए जीएसटी सुधारों के कारण घरेलू खपत मे लगभग 2 लाख करोड़ की वृद्धि होने की उम्मीद है जिस पर देश के आम जनमानस का हक़ होगा।
राकेश ठाकुर ने कहा कि इस संशोधन से राज्यों को सशक्त बनाने के मार्ग खुलेंगे जीएसटी काउंसिल में राज्यों की सहमति और सहभागिता को ओर अधिक मजबूत किया गया है, जिससे सहकार संघीय ढाँचे को मजबूती मिली है। जिससे कर चोरी पर रोक लगने से राजस्व मे बढ़ोतरी होगी और विकास कार्यों व आधारभुत ढांचे में तेजी आएगी। गरीब कल्याण और समाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा बढ़ने से उपभोक्ताओं की खपत बढ़ेगी जोकि उत्पादन क़ो बढ़ाने पर बल देगी और बढ़ा हुआ उत्पादन अधिक रोज़गार के अवसरों क़ो सृजत करेगा अधिक रोज़गार व्यापक कर के आधार क़ो मजबूती देगें जोकि भविष्य मे कम करों का मूल आधार बनेगा। उन्होंने बताया कि यह आर्थिक चक्र राष्ट्रीय विकास के सकारात्मक निर्माण मे सहायक सिद्ध होगा।
पूर्व विधायिका कमलेश कुमारी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्व की कांग्रेस सरकारें वर्षों तक एक राष्ट्र, एक कर, एक बाज़ार व्यवस्था को लागू नहीं कर सकी थी। जिस कारण यूपीए सरकार के समय व्यापक घोटाले हुए और कांग्रेसी नेताओं के भ्रष्टाचार एवं कमजोर आर्थिक नीतियों के कारण देश को विषम आर्थिक दौर से गुजरना पड़ा। इसी कमजोर अर्थनीति के कारण आमजन पर भारी करों का दवाब बना रहा।किसानों को आत्महत्याएँ करने पर मजबूर होना पड़ा। उद्योगपतियों को व्यवसाय विस्थापन और छोड़ने के निर्णय के लिए मजबूर होना पड़ा। लेकिन अब इस संशोधन के लागू होने से मोदी सरकार ने व्यापारियों और उद्योगपतियों के लिए एज ऑफ़ डोइंग बिज़नेस के वातावरण को निर्मित किया है। इस टैक्स व्यवस्था से सभी वर्गों को लाभ पहुंचेगा।
भोरंज से ही पूर्व विधायक रहे डॉ अनिल धीमान ने कहा कि मोदी सरकार के नेतृत्व मे आज सभी वर्गों के लिए बिजनेस फ्रेंडली वातावरण का जहां निर्माण हुआ है वहीं पर उपभोक्ताओं को वर्तमान अर्थनीति बिना किसी डर से खर्च करने को प्रोत्साहित कर रही है जोकि भारत की मजबूत जीडीपी और समृद्ध राजस्व वृद्धि क़ो भी निर्मित करने मे सहायक बन रही है। उन्होंने बताया इसी कारण भारत आज विश्व की चौथी अर्थ व्यवस्था बनकर उभरा है जबकि वर्ष 2014 से पहले भारत विश्व की ग्याहरवी अर्थ व्यवस्था पर बना हुआ था। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक जगत भी मानता है कि मोदी जी के नेतृत्व मे भारत आत्मनिर्भर राष्ट्र बनकर वर्ष 2047 मे सुदृढ़ अर्थव्यवस्था के आधार से विकसित राष्ट्र बनेगा।


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