सरकार और जल शक्ति विभाग के उदासीन रवैये का शिकार हुए चैंथ खड के समीप बसे लोग - कमलेश कुमारी

 सरकार और जल शक्ति विभाग के उदासीन रवैये का शिकार हुए चैंथ खड के समीप बसे लोग - कमलेश कुमारी


Him View - Hamirpur Himachal Pradesh 

नाबार्ड (NABARD) द्वारा 2022 में स्वीकृत 7 करोड़ 42 लाख 82 हजार की राशि अभी भी सरकारी खजाने में पड़ी है,और यथा समय जल शक्ति विभाग ने चैंथ खड के तटीकरण में इस राशि का उपयोग नहीं किया। इस तट के किनारे कुछ गाँव के लोग,उन की जमीन और सरकारी संस्थान खतरे में रहते हैं एक जगह से अगर पानी का बहाव अपनी दिशा बदल ले तो निचले क्षेत्र में बसे गाँव, सेंकड़ों एकड़ भूमी और सरकारी संस्थान जल मगन हो जाएंगे। भोरंज की विधायक कमलेश कुमारी ने प्रैस को जारी व्यान में बताया कि विधायक प्राथमिकता के आधार पर अपने समय में उन्होंने पत्र संख्या पी एल जी एफसी (एफ) 1- 43/21/ आर आई डी एफ 2021-22 दिनांक - 27 दिसंबर 2021 के अनुसार 7 करोड़ 42 लाख 82 हजार रुपए स्वीकृत करवाए थे ।

गत तीन वर्षों में सरकार चैंथ खड के तटीकरण पर स्वीकृत राशि को भी खर्च नहीं कर पायी। 

उन्होंने सरकार पर इलाके की अनदेखी और लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

अच्छा होता के वर्तमान सरकार के नेता नावार्ड और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से भोरंज और जिला हमीरपुर के लिए धन स्वीकृत करवाते। नयी योजनाएं लाना तो दूर की बात है भाजपा के कार्यकाल में स्वीकृत धन राशि को भी उचित समय और उचित स्थान पर खर्च नहीं कर रहे हैं। ऐसे आरोप कांग्रेस नेता भी सरकार पर लगा रहे हैं। तब भी कांग्रेस की नींद नहीं खुल रही है।

तटीकरण ना होने के कारण चैंथ खड्ड के किनारे रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि समय पर नदी के तटों को मजबूत करने का काम (तटीकरण) शुरू हो जाता, तो आज लोगों को अपने घरों और जान-माल की चिंता नहीं करनी पड़ती।

पूर्व विधायक कमलेश कुमारी ने सरकार और जल शक्ति विभाग पर इस लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस देरी से कई महत्वपूर्ण संरचनाओं पर खतरा मंडरा रहा है, जिनमें राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बडेहर, नगरोटा, बधानी, बजड़ोह और चम्बोह शामिल हैं।

इसके अलावा, जाहू बडैहर, कड़ोहता जख्योल, धमरोल और लझ्यानी जैसी कई पेयजल योजनाओं और खड्ड के किनारे बने हजारों रिहायशी मकानों को भी भारी खतरा है। 

पंचायतों के अनेक प्रतिनिधि तथा स्थानीय जनता के लोग भी कई बार विभाग से खतरे वाले स्थानों पर तटीकरण करने की गुहार लगा चुके हैं।

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