भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा नई दिल्ली से वैज्ञानिक पहुंचे करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय - Him View
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा नई दिल्ली से वैज्ञानिक पहुंचे करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय
करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय के सामुदायिक सेवा निदेशालय के डायरेक्ट डा. गुलशन शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्था पूसा नई दिल्ली के वैज्ञानिकों ने रबी मौसमी फसलों के प्रदर्शन के लिए करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय हमीरपुर हिमाचल प्रदेश का दौरा किया और वर्षा आधारित जिला हमीरपुर में खरीफ फसलों के आकलन पर चर्चा की। उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा बिहार के चांसलर प्रो. (डॉ.) पी.एल. से भी इस संदर्भ में बातचीत की।
करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय के सामुदायिक सेवा निदेशालय के डायरेक्ट डा. गुलशन शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान पूसा नई दिल्ली के द्वारा कृषि प्रौद्योगिकी मूल्यांकन व हस्ंतातरण के तहत रबी फसलों जैसे गेंहू , पालक, गाजर, प्याज आदि किस्मों पर किसानों के लिए प्रर्दशिनी लगाई गई। जलवायु परिवर्तन, बिगड़ती मिट्टी की सेहत और गिरावट प्राकृतिक संसाधन भोजन के लिए प्रमुख चुनौतियाँ है। भारतीय कृषि की भविष्य की समृद्धि हमारी वर्तमान तैयारियों पर निर्भर है जलवायु के आसन्न संकट के तहत उत्पादकता को बढ़ावा देना परिवर्तन और घटते संसाधन को आईएआरआई विशाल चुनौती है और विश्वविद्यालय उच्च विकास के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियों के साथ उपज देने वाली और पोषण से भरपूर फसल की किस्में जो किसानों के मुनाफे को अधिकतम कर रही हैं। सामुदायिक सेवा निदेशालय, कृषि समुदायों के बीच क्षेत्र विशिष्ट आवश्यकता आधारित कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने का प्रयास करता है। कृषि स्थिति में उनकी अधिकतम क्षमता का पता लगाने के लिए किसानों के खेत में नई जारी उत्पादन प्रौद्योगिकियों की प्रभावकारिता को प्रदर्शित करने के लिए खरीफ और रबी फसलों पर प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।ताकि किसानों के बीच वितरण फसलों की उन्नत किस्मों से किसान बीज तैयार कर सकता है।
आईएआरआई पूसा द्वारा दिए जा रहे बीजों की प्रदर्शिनी विश्वविद्यालय द्वारा अंगीकृत 75 गांवों व 75 ब्लाकों में किसानों के खेतों में लगाई गई। ताकि इस तरह के हाईब्रिड बीज प्रौद्योगिकी को नजदीकी इलाकों में बीज बैंक के रूप में हस्तातरण किया जा सके। इससे किसानों की खेती पैदावार में बडोतरी होगी तथा वर्षा आधारित कृषि में आने वाली नई जलवायु परिर्वतन चुनौतियों से निपटने में भी किसानो की मदद होगी। ऐसी परियोजनाओं से किसानों की आमदनी में भी बढ़ातरी होगी।
ऐसी परियोजनाओं को लाने का श्रेय विश्वविद्यालय के प्रो चांसलर प्रोफेसर पी.एल.गौतम व कुलपति डा. संजीव शर्मा को जाता है। जिनके अथक प्रयासों से विश्वविद्यालय के सामुदायिक विकास ने एक नया आयाम स्थापित किया है। विश्वविद्यालय में अनुसंधान एवं विकास पर अग्रणी स्तर पर कार्य किया जा रहा है।




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