ये वैठकें रंग लाई। सुरेश कुमार के यही प्रयास पंजाब में दलित मुख्यमंत्री बनाने में सहायक रहे Him View
ये वैठकें रंग लाई। सुरेश कुमार के यही प्रयास पंजाब में दलित मुख्यमंत्री बनाने में सहायक रहे
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पंजाब की दलित राजनीति के सूत्रधार बने हिमाचल प्रदेश के एक दलित नेता जिनकी जुगलबंदी ने पार्टी हाईकमान को पंजाब में एक दलित चेहरे को आजमाने के लिए प्रेरित किया। हिमाचल प्रदेश के दलित नेता सुरेश कुमार कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर है और पंजाब के प्रभारी हैं। अपनी नियुक्ति के तुरंत बाद ही वे पंजाब की दलित राजनीति को गरमाने में लगे थे। इस कड़ी में उन्होंने निवर्तमान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, पार्टी अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू पार्टी प्रभारी हरीश रावत व कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं से पंजाब में दलित आबादी के आधार पर दलित उपमुख्यमंत्री बनाने की वकालत की थी। साथ ही पंजाब की 40% दलित आबादी का हवाला देकर अपनी विस्तृत रिपोर्ट भी पार्टी हाईकमान को सौंपी थी। सुरेश कुमार की उक्त रिपोर्ट पर आलाकमान ने गंभीरता से मनन किया और पंजाब में दलित भागीदारी की पैरवी शुरू हुई। तीन दिन चले सत्ता हस्तांतरण के इस घटनाक्रम के दौरान सुरेश कुमार लगातार चंडीगढ़ में बने रहे और वरिष्ठ नेताओं को दलित मंत्र समझाते रहे। अंतिम घटनाक्रम में सुखजिंदर सिंह रंधावा पर सहमति न बनने पर एक बार फिर सुरेश कुमार ने नवजोत सिंह सिद्धू व अजय माकन से मिलकर दलित कार्ड को आगे सरकाया जिसमें दलित एजेंडे को सफलता मिल गई। और चरणजीत सिंह चन्नी का भाग्य उदय हुआ। चरणजीत सिंह चन्नी सुरेश कुमार के करीबी हैं और पूर्व में युवा कांग्रेस में उनके सहयोगी रह चुके हैं। सुरेश कुमार इससे पहले पंजाब युवा कांग्रेस के प्रभारी भी रह चुके हैं। पंजाब में कुल 117 में से 34 विधानसभा क्षेत्र आरक्षित हैं। जिनमें से वर्तमान में 22 विधायक अनुसूचित जाति के चुनकर आए हैं और 12 विधानसभाओं में पार्टी गत चुनावों में असफल रही थी। पंजाब में इस समय कांग्रेस पार्टी दलित एजेंडे के साथ उतरी है। कांग्रेस के इस दलित एजेंडे को एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। जिससे अन्य राजनीतिक दलों की चिंताएं बढ़ गई हैं। आने वाला समय बताएगा कि पंजाब की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठता है।



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